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Patna Kalam

पटना कलम के बाद : बिहार की कला

“पटना कलम के बाद: बिहार की कला (भाग-1)”

1790 से लेकर अबतक बिहार में चाक्षुष कला की यात्रा कैसी रही है, किन रास्तों से गुजरी है, इस पर एक विहंगम दृष्टि डालती है “पटना कलम के बाद: बिहार की कला” पुस्तक।

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बाजार और मूल्य पर आधारित थे पटना कलम के चित्र: डा. राखी कुमारी

पटना कलम के चित्र मुख्यत: बाजार की मांग और मूल्य के अनुरूप थे। वह इस बात पर निर्भर करता था कि चित्रों के विषय क्या हैं और उनका खरीदार कौन है।

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ईश्वरी प्रसाद वर्मा: ‘पटना कलम’ के आखिरी चित्रकार

ईश्वरी प्रसाद वर्मा हांथी दांत, अबरक की परतों, सिल्क और कागज पर चित्राकंन में माहिर कलाकार थे। उन्होंने यूरोपीय कला के आधार पर बड़े तैल चित्रों का भी निर्माण किया था।

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