Welcome to folkartopedia archives.

What are you looking for in the Archives?

Padma shri Shyam Sharma

पद्मश्री प्रोफेसर श्याम शर्मा : एक संस्मरण, लखनऊ-1966

प्रिंट-मेकिंग में पोस्ट डिप्लोमा करने की इच्छा लिए एक छात्र मेरे पास आया। मुझे लगा, कमर्शियल आर्ट का डिप्लोमा करनेवाला प्रिंट-मेकिंग में काम कर पायेगा ?

Read More »

पद्मश्री श्याम शर्मा की नजर से लोककला और समाज

आज व्यावसायिकता में लोककला के मूल तत्व बिखर रहे हैं। उनकी सहजता, सरलता नष्ट हो रही है। कला में परिवर्तन ग्राह्य है पर उनमेंं उच्छृंखलता का कोई स्थान नहीं है।

Read More »

कला नितांत ही व्यक्तिगत साधना है: पद्मश्री श्याम शर्मा

आर्ट कॉलेज की स्थिति यह है कि मेरे पास लोटा भर पानी है और छात्र उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें बाल्टी भर पानी मिल जाए। यह कैसे संभव है। हमने अपने पात्र बड़े किये ही नहीं।

Read More »
Receive the latest update

Subscribe To Our Weekly Newsletter

Get notified about new articles