लोकनायक राजा सलहेस का चरित्र-चित्रण
बिहार के सबसे लोकप्रिय लोकनायकों में से एक राजा सलहेस, मिथिलांचल और अलग-अलग इलाकों में प्राय: राजा सलहेस, लोकनायक सलहेस, सूरमा सलहेस या सलहेस भगत के नाम से संबोधित होते हैं।
बिहार के सबसे लोकप्रिय लोकनायकों में से एक राजा सलहेस, मिथिलांचल और अलग-अलग इलाकों में प्राय: राजा सलहेस, लोकनायक सलहेस, सूरमा सलहेस या सलहेस भगत के नाम से संबोधित होते हैं।
लोकगाथा सलहेस में मौजूद दलितों की मुखर अभिव्यक्ति तिरोहित दिखती है, अब ‘समाज’ को जागृत करने का उत्स नहीं दिखता और चित्रों में उनका निरूपण महज आलंकारिक है।
लोकगाथा राजा सलहेस न केवल एक दलित-शोषित समाज की वास्तविकताओं व अपेक्षाओं की गाथा है, वह उनकी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक टकराहटों की भी गाथा है।
लोकगाथा राजा सलहेस ने बिहार में एक संस्कृति को जन्म दिया जो समतामूलक समाज की मांग करता है। यह साधनसंपन्न सवर्ण समाज के लिए पचा पाना आसान नहीं है।
राजा सलहेस, बिहार की लोकगाथाओं में सबसे लोकप्रिय है। उनकी स्वीकार्यता सर्वजातीय समाज में है। इस लोकगाथा में अनेक अंतर्जातीय विवाह हैं। विवाहों के दौरान तमाम संघर्ष, जादू-टोना और दाव-पेंच दर्शकों को खासा रोमांचित करता है।
Sir George Abraham Grierson OM KCIE (7 January 1851 – 9 March 1941) was an Irish administrator and linguist in British India. He worked in the Indian Civil Services but an interest in philology and linguistics led him …
डॉ. ग्रियर्सन ने 1881 में इंट्रोडक्शन टू द मैथिली लिटरेचर ऑफ नॉर्थ बिहार, क्रिस्टोमैथी एंड वोकैबुलरी पुस्तक लिखी, जिसमें पहली बार राजा सलहेस की चर्चा मिलती है।
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