“पटना कलम के बाद: बिहार की कला (भाग-1)”
1790 से लेकर अबतक बिहार में चाक्षुष कला की यात्रा कैसी रही है, किन रास्तों से गुजरी है, इस पर एक विहंगम दृष्टि डालती है “पटना कलम के बाद: बिहार की कला” पुस्तक।
1790 से लेकर अबतक बिहार में चाक्षुष कला की यात्रा कैसी रही है, किन रास्तों से गुजरी है, इस पर एक विहंगम दृष्टि डालती है “पटना कलम के बाद: बिहार की कला” पुस्तक।
आजादी के बाद पचास के दशक में बिहार के समकालीन चित्रकला में आधुनिकता का प्रवेश और उसके विकास के उत्प्रेरक के रूप में बी.एन. श्रीवास्तव का नाम अग्रगणी है।
वरिष्ठ कलाकार आनंदी प्रसाद बादल बिहार में आधुनिक कला के विकास के साक्षी रहे हैं। उनकी कला-यात्रा को समझना बिहार में आधुनिक-कला की यात्रा से एक साक्षात्कार समान है।
लोक-कलाओं का वर्तमान इसकी गवाही देता है कि जब तक उन्होंने क्षेत्रीयता के दायरे से बाहर झांकने की कोशिश नहीं की है, उनका दृष्टिकोण व्यापक नहीं हुआ, उन्हें पहचान नहीं मिली है।
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