लोकनायक राजा सलहेस का चरित्र-चित्रण
बिहार के सबसे लोकप्रिय लोकनायकों में से एक राजा सलहेस, मिथिलांचल और अलग-अलग इलाकों में प्राय: राजा सलहेस, लोकनायक सलहेस, सूरमा सलहेस या सलहेस भगत के नाम से संबोधित होते हैं।
बिहार के सबसे लोकप्रिय लोकनायकों में से एक राजा सलहेस, मिथिलांचल और अलग-अलग इलाकों में प्राय: राजा सलहेस, लोकनायक सलहेस, सूरमा सलहेस या सलहेस भगत के नाम से संबोधित होते हैं।
This article analyzes the theme of “kidnapping‟ in myth, folk lore and traditional storytelling among some adivasi communities in the Himalayas.
लोक’ और ‘दलित’ न केवल अलग-अलग शब्द हैं बल्कि उनके प्रयोगों के संदर्भ भी अलग-अलग हैं। ‘लोक’ अत्यंत ही प्राचीन शब्द है जबकि दलित शब्द अपेक्षाकृत उससे नया।
लोकगाथा सलहेस में मौजूद दलितों की मुखर अभिव्यक्ति तिरोहित दिखती है, अब ‘समाज’ को जागृत करने का उत्स नहीं दिखता और चित्रों में उनका निरूपण महज आलंकारिक है।
लोकगाथा सोरठी बृजभार संपूर्ण बिहार और अवध क्षेत्र में लोकप्रिय है। माना जाता है कि इसकी शुरुआत 1100 – 1325 ई. के बीच हुई जब नाथपंथ का प्रभाव पूरे क्षेत्र में प्रबल था।
Rajasthani folklore Raja Bharthari-ki-Katha expresses the values of love, sacrifice, advocacy, spirituality and dutifulness in a person.
Bihula-Bisahari is one of the folklore traditions of Bihar, practiced in the Bhagalpur area. Now-a-days though the oral songs are not as popular, an effort is being made to revive them.
Padma Shri Upendra Maharathi worked extensively with local craftsmen of Bihar and Orissa to carry on the task of reviving the folk forms and giving them the status of living traditions.
राजा सलहेस, बिहार की लोकगाथाओं में सबसे लोकप्रिय है। उनकी स्वीकार्यता सर्वजातीय समाज में है। इस लोकगाथा में अनेक अंतर्जातीय विवाह हैं। विवाहों के दौरान तमाम संघर्ष, जादू-टोना और दाव-पेंच दर्शकों को खासा रोमांचित करता है।
डॉ. ग्रियर्सन ने 1881 में इंट्रोडक्शन टू द मैथिली लिटरेचर ऑफ नॉर्थ बिहार, क्रिस्टोमैथी एंड वोकैबुलरी पुस्तक लिखी, जिसमें पहली बार राजा सलहेस की चर्चा मिलती है।
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